दैवी ह्येषा गुणमयी मम माया दुरत्यया। मामेव ये प्रपद्यन्ते मायामेतां तरन्ति ते ॥ 14॥ दैवी ह्य एषा गुणमयी
"Welcome to Hare Krishna Mandir Basti"
श्री श्री राधा माधव अवध बिहारी हरे कृष्ण मंदिर, मालवीय रोड, बैरियाहवां, बस्ती (उत्तर प्रदेश, भारत) में स्थित एक आध्यात्मिक एवं भक्ति केंद्र है, जहाँ श्रीकृष्ण के पवित्र नाम, कृष्ण भक्ति और कृष्ण प्रेम के संदेश का प्रचार-प्रसार किया जाता है। यह मंदिर 3 जून 2025 को स्थापित हुआ, और तभी से निरंतर समाज में आध्यात्मिक जागरण एवं भगवान के प्रति प्रेमभाव जागृत करने के लिए कार्यरत है।
हरे कृष्ण आंदोलन की शुरुआत स्वयं साक्षात् भगवान श्रीकृष्ण (श्री चैतन्य महाप्रभु) ने की थी, जिन्होंने हरिनाम संकीर्तन के माध्यम से संपूर्ण विश्व में कृष्ण भावनामृत आंदोलन की स्थापना की। इस दिव्य परंपरा को आगे बढ़ाते हुए श्रील जगन्नाथ दास बाबा जी, श्रील भक्तिविनोद ठाकुर, श्रील गौर किशोर दास बाबा जी, श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर, श्रील ए. सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद तथा अन्य अनेक आचार्यों ने इसे संसार के कोने-कोने तक पहुँचाया। हम उसी गौड़ीय वैष्णव परंपरा के मिशन को आगे बढ़ा रहे हैं — ताकि प्रत्येक जीव के हृदय में श्रीकृष्ण के नाम, भक्ति, प्रेम, दया, सत्यनिष्ठा और समानता की ज्योति प्रज्वलित हो सके।
हमारा संकल्प है — “हर घर में भगवान श्रीकृष्ण का नाम पहुँचे, हर हृदय में भक्ति जागे, समाज में दया, ईमानदारी, संयम और समान भाव का प्रसार हो; छुआछूत और भेदभाव रहित समाज का निर्माण हो; राष्ट्र में शांति, प्रेम और एकता स्थापित हो, और सम्पूर्ण मानवता ईश्वरीय प्रेम में एक हो।”
हम न केवल आध्यात्मिक उन्नति, बल्कि सामाजिक सुधार, नशा-मुक्त जीवन, जीव-दया, चरित्र निर्माण, देशभक्ति और नवयुवकों में जागरूकता एवं नैतिक सुधार को भी अपनी साधना का अंग मानते हैं। हम यह मानते हैं कि सच्चा भक्त वह है जो सबका सम्मान करे, सभी को दया और करुणा देखे और अपने धर्म तथा शास्त्रों के वास्तविक ज्ञान के प्रति जागरूक रहे।
मंदिर में प्रतिदिन नित्य आरती, हरिनाम जप, हरिनाम संकीर्तन, श्रीमद्भागवतम कथा, भगवद्गीता अध्ययन, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण जैसे दिव्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक शिक्षा एवं संस्कार केंद्र है — जहाँ हर आयु, वर्ग, जाति, धर्म, वर्ण, संप्रदाय और राष्ट्र के लोग कृष्णभावनामृत, दयालु, संयमित, समानता-भाव और ईमानदार जीवन शैली को अपनाना सीखते हैं।
श्रील प्रभुपाद जी की दिव्य शिक्षाओं एवं गौड़ीय वैष्णव सिद्धांतों के अनुरूप, समाज में भगवान श्रीकृष्ण की प्रेममयी भक्ति का प्रचार करना और प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में शांति, सत्य, दया, ईमानदारी, समानता, संयम और समर्पण का प्रसार करना हमारा मुख्य उद्देश्य है।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
The soul and the divine are simultaneously one and different—a sacred mystery beyond rational thought.
Singing divine names in kirtan awakens spiritual consciousness and nurtures love of God.
Souls are eternal and transmigratory—seeking pure love of the divine.
We guide seekers along a path of knowledge (sambandha), heartfelt practice (abhidheya), and divine love (prayojana).
Knowledge of the eternal link between soul, divine, and world.
The spiritual practices of devotion—the means to deepen connection.
The blossoming of divine love—our soul’s eternal destination.
Founder Acharya
His Divine Grace A.C. Bhaktivedanta Swami Srila Prabhupada
Disciple of Srila Prabhupada
A.C. Bhaktivedanta Swami Srila Prabhupada
Consultant / Spiritual Leader
Temple President for 24 years.
Preacher / Manager
Expert in cooking, book distribution & mentorship.